बाल कलाकारों के सशक्त अभिनय से जीवंत हुआ ‘भुलवा भुलक्कड़’

बाल कलाकारों के सशक्त अभिनय से जीवंत हुआ ‘भुलवा भुलक्कड़’

रंगमंच, कला एवं साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित सूत्रधार संस्थान, आज़मगढ़ द्वारा आयोजित दो दिवसीय “पनिया धनुष बाल नाट्य उत्सव” के दूसरे दिन रैदोपुर स्थित आनंद मार्ग विद्यालय के भरतमुनि सभागार में अभिषेक पंडित द्वारा लिखित एवं ममता पंडित द्वारा निर्देशित बाल नाटक “भुलवा भुलक्कड़” का प्रभावशाली मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के अध्यक्ष डॉ. सी. के. त्यागी, भारतेन्दु कश्यप एवं राहुल यादव द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

नाटक “भुलवा भुलक्कड़” एक ऐसे बालक भुलवा की रोचक और हास्यपूर्ण कहानी है, जो अपनी अत्यधिक भूलने की आदत के कारण हमेशा नई-नई परेशानियों में फंस जाता है। उसकी दादी राजमहल के लिए कपड़े सिलने का कार्य करती हैं। जब दादी को अपने मेहनताने की राशि प्राप्त करनी होती है, तो वे भुलवा को राजमहल भेजती हैं। रास्ते में भुलवा अपनी भुलक्कड़ प्रवृत्ति के कारण कई हास्यास्पद घटनाओं और विचित्र परिस्थितियों में उलझ जाता है। कभी वह अपना उद्देश्य भूल जाता है तो कभी रास्ते में मिलने वाले लोगों की बातों में उलझकर नई मुसीबत खड़ी कर देता है। अंततः जब वह राजमहल पहुंचता है, तो घटनाओं का ऐसा क्रम सामने आता है जो दर्शकों को हँसी के साथ-साथ जीवन की महत्वपूर्ण सीख भी देता है। नाटक ने मनोरंजन के माध्यम से एकाग्रता, जिम्मेदारी और स्मरण शक्ति के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

नाटक में दादी की भूमिका में वेदिका तथा भुलवा के मुख्य पात्र में अमरजीत ने अपने स्वाभाविक एवं प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। हिमांशी, जयश्री, गौरीप्रिया और आशिन ने नर्तक एवं भक्त पात्रों के माध्यम से मंच को जीवंत बनाया। अक्षत, अमन, युवराज और कृष्णा पांडेय ने पतंग वाले बच्चों की भूमिकाओं में बाल सुलभ चंचलता का सुंदर प्रदर्शन किया। सिद्धार्थ ने बहेलिया एवं सेनापति तथा पीहू, प्रांजल, आन्वी, गार्विका और गौरीश्री ने चिड़िया एवं विद्यार्थियों की भूमिकाओं में अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रभावशाली परिचय दिया।

कृष्णा यादव ने स्वामी अतिआनंद, यशस्वी ने भक्त, दृष्टि ने अध्यापिका तथा ओमश्री ने राजा की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से निभाया। वहीं कृति, दिव्यांश और अविरल ने खजाना चोर के पात्रों में रोचकता पैदा की। आयांश, आद्विक और अभिनव ने विद्यार्थियों की भूमिका निभाकर प्रस्तुति को और अधिक सशक्त बनाया। सभी बाल कलाकारों ने अपने आत्मविश्वास, संवाद अदायगी और मंचीय अनुशासन से दर्शकों की भरपूर प्रशंसा प्राप्त की।

नाटक की सफलता में मंच के पीछे कार्यरत टीम की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। वस्त्र परिकल्पना का दायित्व नेहा रिद्धि मित्रा, हर्ष मौर्य एवं राहुल यादव ने संभाला। संगीत संयोजन मुहम्मद जानी एवं अनादि अभिषेक द्वारा किया गया, जबकि ढोलक पर सहदेव ने अपनी सशक्त थाप से प्रस्तुति को प्रभावी बनाया। प्रकाश व्यवस्था रंजीत कुमार एवं सुरजनाथ यादव ने संभाली। मंच सज्जा एवं सेट निर्माण का कार्य अंगद कश्यप, संदीप गोंड एवं सत्यम कुमार द्वारा किया गया, जिसकी दर्शकों ने विशेष सराहना की।

बाल कलाकारों की ऊर्जा, ममता पंडित के संवेदनशील एवं सशक्त निर्देशन तथा तकनीकी टीम के समन्वित प्रयासों से उत्सव का दूसरा दिन अत्यंत सफल एवं यादगार रहा। दर्शकों ने प्रस्तुति को भरपूर सराहना देते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। नाटक ने यह सिद्ध किया कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और मंच मिले तो वे अपनी प्रतिभा से किसी भी प्रस्तुति को जीवंत और प्रभावशाली बना सकते हैं।

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