स्टेचर पर ताला, बेटों ने हाथों को बनाया सहारा, गोद में उठाकर मां को पहुंचाया डॉक्टर तक, एसआईसी बोले जांच कराएंगे

स्टेचर पर ताला, बेटों ने हाथों को बनाया सहारा, गोद में उठाकर मां को पहुंचाया डॉक्टर तक, एसआईसी बोले जांच कराएंगे

आजमगढ़। मंडलीय जिला चिकित्सालय में मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। पवई थाना क्षेत्र की रहने वाली 50 वर्षीय राजपत्ती देवी, जिन्हें कुछ दिन पहले सिर में चोट लगी थी और जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, अपने दोनों बेटों के साथ न्यूरो साइकाइट्रिक विशेषज्ञ को दिखाने जिला अस्पताल पहुंचीं।
परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी के पास मरीज को ओपीडी तक ले जाने के लिए स्टेचर लेने पहुंचे तो सभी स्टेचर जंजीर से बंधे मिले और उन पर ताला लगा था। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी स्टेचर उपलब्ध नहीं हुआ। मजबूरी में दोनों बेटों ने अपने हाथों को ही सहारा बनाकर मां को उठाया और ओपीडी की ओर चल पड़े।
ओपीडी पहुंचने से पहले अधिक दूरी तक मां को उठाकर ले जाने के कारण बेटों के हाथों में दर्द होने लगा। उन्होंने कुछ देर के लिए मां को नीचे उतारकर राहत की सांस ली, पसीना पोंछा और फिर गोद में उठाकर ओपीडी के बाहर बैठाया। इस दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने घटना का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में इमरजेंसी के पास स्टेचर जंजीर और ताले से बंधे दिखाई दे रहे हैं, जबकि मरीज को दो लोग कंधे और हाथों के सहारे उठाकर ले जाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए स्टेचर जैसी मूलभूत सुविधा भी समय पर उपलब्ध नहीं हो

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सतीश चंद्र कन्नौजिया ने बताया कि फिलहाल यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है और न ही उन्होंने अभी तक वह वायरल वीडियो देखा है।
उन्होंने स्ट्रेचर ताला लगे होने की बात से इनकार करते हुए कहा कि अस्पताल में करीब 60-65 स्ट्रेचर और पर्याप्त मात्रा में व्हीलचेयर उपलब्ध हैं, जिनमें से कई खुले रहते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल 3-4 स्ट्रेचर ही इमरजेंसी स्थितियों के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं। अस्पताल में 24 घंटे वार्ड बॉय ड्यूटी पर रहते हैं, जो जरूरत पड़ने पर मरीजों को स्ट्रेचर उपलब्ध कराते हैं।

उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच कराई जाएगी कि यह वीडियो उनके अस्पताल का है या नहीं, और किन परिस्थितियों में मरीजों को इस तरह जाना पड़ा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।रही है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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