बिना बाहरी कोचिंग के समीर श्रीवास्तव एवं सौरभ यादव ने जेईई एडवांस्ड 2026 में सफलता प्राप्त कर आईआईटी मद्रास में सुनिश्चित किया प्रवेश

बिना बाहरी कोचिंग के समीर श्रीवास्तव एवं सौरभ यादव ने जेईई एडवांस्ड 2026 में सफलता प्राप्त कर आईआईटी मद्रास में सुनिश्चित किया प्रवेश

जीडी ग्लोबल स्कूल, करतालपुर बाइपास, आजमगढ़ के लिए यह अत्यंत हर्ष, गौरव एवं उपलब्धि का क्षण है कि विद्यालय के मेधावी छात्र समीर श्रीवास्तव एवं सौरभ यादव ने जेईई एडवांस्ड 2026 परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करते हुए देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक आईआईटी मद्रास में प्रवेश सुनिश्चित किया है। इस उपलब्धि को और भी विशेष बनाता है यह तथ्य कि दोनों विद्यार्थियों ने बिना किसी बाहरी कोचिंग अथवा ट्यूशन के, अपनी लगन, आत्मानुशासन, सतत परिश्रम तथा विद्यालय के शिक्षकों के मार्गदर्शन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता इस सत्य को पुनः स्थापित करती है कि समर्पण, दृढ़ संकल्प और सही दिशा में किया गया प्रयास किसी भी लक्ष्य को साकार कर सकता है।
विद्यालय की निदेशिका स्वाति अग्रवाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “समीर और सौरभ की सफलता विद्यालय की उस शैक्षिक संस्कृति की सार्थकता का प्रमाण है, जो विद्यार्थियों में जिज्ञासा, आत्मविश्वास और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता का विकास करती है। यह उपलब्धि केवल दो छात्रों की सफलता नहीं, बल्कि संपूर्ण विद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों की गौरवपूर्ण अभिव्यक्ति है।” विद्यालय के प्रबंधक गौरव अग्रवाल ने कहा, “हमारा सदैव प्रयास रहा है कि आजमगढ़ और पूर्वांचल के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को महानगरों की ओर पलायन किए बिना अपने ही शहर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, श्रेष्ठ शैक्षणिक वातावरण और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध हो। हम चाहते हैं कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और विद्यार्थी अपने परिवार के सान्निध्य में रहकर ही बड़े से बड़े लक्ष्य प्राप्त करें। समीर और सौरभ की सफलता इस सोच की सार्थकता का प्रमाण है। उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि यदि विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी एक लक्ष्य के प्रति समर्पित हों तो सफलता के लिए किसी बाहरी सहारे की आवश्यकता नहीं होती।” कार्यकारी निदेशक श्रीश अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा, “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल उपलब्धियाँ अर्जित करना नहीं, बल्कि ऐसी सोच विकसित करना है जो विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, जिज्ञासु और जीवन की चुनौतियों के प्रति सजग बनाए। समीर और सौरभ की सफलता इसी उद्देश्य की सार्थक परिणति है।” विद्यालय की प्रधानाचार्या दीपाली भुस्कुटे ने दोनों छात्रों को बधाई देते हुए कहा, “समीर और सौरभ की उपलब्धि अनुशासन, धैर्य और निरंतर अभ्यास की प्रेरक कहानी है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि लक्ष्य चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि संकल्प दृढ़ हो तो सफलता निश्चित है।”

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