78वें स्थापना दिवस पर अभाविप का ‘छात्र महोत्सव’ आयोजित, छात्र शक्ति ने जाना परिषद का ध्येय

78वें स्थापना दिवस पर अभाविप का ‘छात्र महोत्सव’ आयोजित, छात्र शक्ति ने जाना परिषद का ध्येय

विद्यार्थी परिषद केवल शिक्षा नहीं, दायित्वबोध और राष्ट्रभाव का भी निर्माण करती है : अंशुल विद्यार्थी

आजमगढ़। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 78वें स्थापना दिवस एवं ‘राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस’ के अवसर पर आजमगढ़ के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में छात्र शक्ति ने उत्साहपूर्वक स्थापना दिवस मनाया। इसी क्रम में शुक्रवार को हरिऔध कला केंद्र, आजमगढ़ के सभागार में ‘छात्र महोत्सव’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सविष्कार के अखिल भारतीय प्रमुख अंशुल विद्यार्थी, मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश मंत्री सहजानंद राय, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आशीष श्रीवास्तव, जिला प्रमुख डॉ. रामजन्म दुबे, जिला संयोजक आदित्य गुप्ता उपस्थित रहे।

अभाविप के 78वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘छात्र महोत्सव’ के माध्यम से विद्यार्थियों को परिषद की 78 वर्षों की ध्येय यात्रा, संगठन की कार्यदृष्टि एवं राष्ट्र पुनर्निर्माण के संकल्प से परिचित कराया गया। इस अवसर पर परिषद द्वारा समय-समय पर संचालित आंदोलनों, रचनात्मक कार्यक्रमों तथा विद्यार्थी और समाजहित में किए गए विभिन्न प्रयासों से आए सकारात्मक परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। साथ ही विद्यार्थियों को राष्ट्र, समाज और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सविष्कार के अखिल भारतीय प्रमुख अंशुल विद्यार्थी ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अपने स्थापना काल से ही विद्यार्थियों के मन में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और चरित्र निर्माण के संस्कारों का संचार करती रही है। उन्होंने कहा कि परिषद केवल छात्र हितों के लिए संघर्ष करने वाला संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित छात्र संगठन है।विद्यार्थी परिषद की कार्यपद्धति हमें सिखाती है कि “शिक्षा केवल जीविका के लिए नहीं, बल्कि जीवन के निर्माण के लिए होनी चाहिए; और जीवन केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित होना चाहिए।” इसी भाव के साथ परिषद प्रत्येक विद्यार्थी को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराती है।उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद केवल समस्याओं को रेखांकित करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि उन समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय, संवेदनशील और समर्पित कार्यकर्ताओं का संगठन है।

मुख्य अतिथि सहजानंद राय ने अपने विद्यार्थी जीवन में अभावियों से जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि परिषद ने उनके व्यक्तित्व और जीवन-दृष्टि को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद की ही देन है कि उनके जैसे सैकड़ों विद्यार्थी ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ विभिन्न क्षेत्रों में समाज और राष्ट्र की सेवा में समर्पित हैं।आज समाज और शिक्षा जगत में दिखाई देने वाले अनेक सकारात्मक परिवर्तन विद्यार्थी परिषद के सतत संघर्ष, रचनात्मक कार्यों और राष्ट्रहित के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद के 78 वर्षों का इतिहास केवल आंदोलनों का नहीं, बल्कि रचनात्मक परिवर्तन का इतिहास है। शिक्षा सुधार, छात्रहित, सेवा कार्य और राष्ट्रीय एकात्मता के क्षेत्र में परिषद ने निरंतर उल्लेखनीय कार्य किए हैं। स्टूडेंट्स एक्सपीरियंस इन इंटरस्टेट लिविंग के माध्यम से परिषद ने पूर्वोत्तर भारत और देश के अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं राष्ट्रीय एकात्मता को सशक्त किया है, जिससे “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को बल मिला है।

कार्यक्रम के अंत में जिला प्रमुख डॉ. रामजन्म दुबे ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थी परिषद राष्ट्र निर्माण के अपने ध्येय के साथ निरंतर छात्रहित एवं समाजहित में कार्य करती रहेगी। कार्यक्रम का संचालन अंशिता सिंह ने किया। इसके उपरांत राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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