आजमगढ़ में शिक्षकों से बोले सुरेश चंद्र त्रिपाठी—राजनीतिक दलों के भरोसे नहीं, अपनी एकजुटता से लड़ें हक की लड़ाई; डॉ. शरदेंदु कुमार त्रिपाठी को प्रथम वरीयता देने की किया अपील

आजमगढ़ में शिक्षकों से बोले सुरेश चंद्र त्रिपाठी—राजनीतिक दलों के भरोसे नहीं, अपनी एकजुटता से लड़ें हक की लड़ाई; डॉ. शरदेंदु कुमार त्रिपाठी को प्रथम वरीयता देने की किया अपील

आजमगढ़। शिक्षक चुनाव की सरगर्मी तेज होते ही प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी बीच शिक्षक नेता सुरेश चंद्र त्रिपाठी आजमगढ़ पहुंचे और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. शरदेंदु कुमार त्रिपाठी के समर्थन में शिक्षकों से मतदान की अपील की। उनका पूरा संबोधन शिक्षक हितों, संगठन की एकजुटता और राजनीतिक दलों के प्रभाव से मुक्त शिक्षक नेतृत्व के इर्द-गिर्द रहा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह चुनाव केवल प्रत्याशी चुनने का नहीं, बल्कि शिक्षकों के स्वाभिमान और स्वतंत्र नेतृत्व को बचाने की लड़ाई है।
सुरेश चंद्र त्रिपाठी ने पत्रकारों से कहा, “अब लड़ाई सिंबल और संबल की है। सिंबल राजनीतिक दलों से मिल सकता है, लेकिन असली संबल शिक्षकों की एकजुटता और विश्वास से मिलता है।” उन्होंने पूर्व शिक्षक नेताओं और ओमप्रकाश शर्मा की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक समाज ने अपने अधिकार राजनीतिक दलों के भरोसे नहीं, बल्कि संघर्ष और संगठन की ताकत से हासिल किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के करीब जाने से शिक्षक संगठनों की एकता कमजोर हुई है और शिक्षक अपने प्रतिनिधियों से निराश महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे किसी राजनीतिक गुट या आपसी विभाजन की राजनीति में उलझने के बजाय अपने शैक्षिक हितों को प्राथमिकता दें। डॉ. शरदेंदु कुमार त्रिपाठी को शिक्षकों के बीच से उभरे एक समर्पित प्रतिनिधि के रूप में पेश करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज को ऐसा नेतृत्व चुनना चाहिए, जो उनकी समस्याओं को सदन और सरकार तक मजबूती से पहुंचा सके।

अपने संबोधन में सुरेश चंद्र त्रिपाठी ने पुरानी पेंशन, शिक्षक सम्मान और सेवा-सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि दशकों तक राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले शिक्षक सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से वंचित क्यों रहें? उन्होंने भरोसा दिलाया कि अवसर मिलने पर शिक्षक हितों की लड़ाई हिंसा या टकराव से नहीं, बल्कि कलम, बौद्धिक क्षमता और लोकतांत्रिक संघर्ष के जरिए लड़ी जाएगी।
अंत में उन्होंने शिक्षकों से 23 अक्टूबर 2026 को मतपत्र में क्रमांक 14 पर डॉ. शरदेंदु कुमार त्रिपाठी को प्रथम वरीयता का मत देकर विजयी बनाने की अपील की। उनका संदेश स्पष्ट था—शिक्षक अपनी ताकत पहचानें, एकजुट रहें और अपने प्रतिनिधि का चयन राजनीतिक प्रभाव के बजाय शिक्षक हितों के आधार पर करें

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