अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने MRP व्यवस्था पर कानून बनाने की मांग उठाई
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) ने केंद्र सरकार से अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की मौजूदा व्यवस्था पर सख्त कानून बनाने की मांग की है। संगठन ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और उपभोक्ता मामलों के मंत्री को ज्ञापन भेजकर MRP पर ऊपरी सीमा तय करने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में उत्पादों पर MRP तय करने की कोई स्पष्ट सीमा नहीं है, जिससे निर्माता और व्यापारी मनमाने ढंग से कीमतें तय कर रहे हैं। ABGP के अनुसार, MRP उपभोक्ता संरक्षण के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब यह कई मामलों में विपणन और अत्यधिक मुनाफाखोरी का माध्यम बन गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि कई उत्पादों, विशेषकर दवाओं और मेडिकल उपकरणों में उत्पादन लागत और MRP के बीच भारी अंतर देखने को मिलता है, जहां कई बार कीमत लागत से कई गुना अधिक होती है। संगठन ने आरोप लगाया कि भारी छूट (डिस्काउंट) की व्यवस्था भी इस असंतुलन को दर्शाती है।
ABGP ने मांग की है कि उत्पादन लागत का स्पष्ट उल्लेख, पहली बिक्री कीमत (First Sale Price) का उल्लेख और MRP की अधिकतम सीमा तय करने वाला कानून बनाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और कमजोर प्रवर्तन के कारण उपभोक्ताओं का शोषण हो रहा है।
संगठन ने बताया कि इस मुद्दे पर मई 2026 में दिल्ली में एक बड़े जन-जागरूकता कार्यक्रम की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं और सरकार का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित किया जा सके।
ABGP का कहना है कि यदि MRP प्रणाली को पारदर्शी और नियंत्रित नहीं किया गया तो बाजार में मूल्य निर्धारण और अधिक असंतुलित हो सकता है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
