ककरघटा में विकास के दावों की खुली पोल, गलियों से स्कूल तक जलभराव का बोलबाला

ककरघटा में विकास के दावों की खुली पोल, गलियों से स्कूल तक जलभराव का बोलबाला
2011 से जलनिकासी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण, शिकायतों के बाद भी नहीं निकला समाधान
रीना वर्मा

कन्नौज। विकास खंड उमर्दा की ग्राम पंचायत ककरघटा में ककरघटा, सिमुआपुर और खरगापुर गांव शामिल हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचवर्षीय योजना के दौरान ग्राम पंचायत में धरातल पर अपेक्षा के अनुरूप विकास कार्य नहीं कराए गए। गांवों में छोटी-छोटी समस्याएं अब विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। सबसे गंभीर समस्या ककरघटा और खरगापुर गांव में जलनिकासी की है। मेन रोड से लेकर गलियों तक पानी भरा रहने के कारण ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक ककरघटा गांव की आबादी करीब 1200 है। गांव के कई मोहल्लों में नालियों का पानी आगे निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है। बरसात के दिनों में ही पानी खेतों की ओर निकल पाता है, जबकि अन्य दिनों में ग्रामीणों को अपने घरों के सामने ही नाली का पानी रोककर रखना पड़ता है। जलनिकासी की समस्या को लेकर ग्रामीण कई वर्षों से ग्राम पंचायत से लेकर जिलाधिकारी तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2011 से गांव जलनिकासी की समस्या से जूझ रहा है। पहले गांव में कच्ची सड़कें थीं, जिससे घरों के आसपास छोटे गड्ढों में पानी जमा होकर जमीन में सोख जाता था। सड़कें पक्की होने के बाद आवागमन की सुविधा तो बढ़ी, लेकिन जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से समस्या और गंभीर हो गई।
ककरघटा गांव में करीब तीन गलियां ऐसी हैं, जहां नाली का पानी आगे नहीं जा पाता। बरसात में पानी खेतों की ओर निकलता है, लेकिन अन्य समय खेतों में फसल होने के कारण किसान पानी रोक देते हैं। इससे गलियों और सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी रहती है।
गांव के प्राथमिक विद्यालय की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। विद्यालय के मुख्य द्वार और सामने की सड़क पर जलभराव रहता है। ग्रामीणों के अनुसार करीब पांच वर्ष पहले जलनिकासी की समस्या के चलते विद्यालय के दो कमरे, बरामदा और कार्यालय ढह गए थे। आरोप है कि अब तक इनका निर्माण नहीं कराया गया। वर्तमान में बचे हुए एक कमरे, आंगनवाड़ी कक्ष और सरकारी मेहमान घर में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
गांव के सरकारी मेहमान घर के सामने मुख्य सड़क पर भी पानी भरा रहता है। वहीं मुख्य मार्ग पर नाली की समुचित व्यवस्था नहीं होने और नालियों की सफाई न होने से सड़क भी खराब हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश घरों के सामने गंदा पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। हाल में गांव में बड़ी संख्या में लोगों के बुखार और डेंगू से पीड़ित होने की बात भी सामने आई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचवर्षीय योजना में ग्राम पंचायत को विकास कार्यों के लिए धनराशि मिलने के बावजूद जलनिकासी जैसी मूल समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों और खर्च की गई धनराशि की सक्षम अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ग्राम पंचायत में कितने कार्य स्वीकृत हुए, कितने धरातल पर कराए गए और उन पर कितनी धनराशि खर्च हुई।
इस संबंध में ग्राम पंचायत ककरघटा के सचिव राजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें ग्राम पंचायत में आए करीब एक वर्ष हुआ है। उनके कार्यकाल में लगभग 15 लाख रुपये के कार्य कराए गए हैं। इसके बाद विकास कार्यों और जलनिकासी की समस्या को लेकर पूछे गए अन्य सवालों पर सचिव की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें ऐसे विकास कार्यों की जरूरत है, जिनसे उनकी रोजमर्रा की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके। जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त कराने, खराब सड़कों की मरम्मत कराने और विद्यालय के ढहे भवन का पुनर्निर्माण कराने की मांग ग्रामीणों ने अधिकारियों से की है।

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