लोक प्रिय नेता के अंतिम संस्कार में टूटी दलीय सीमा
-श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद जनाजे में शामिल हुए सभी दलों के जनप्रतिनिधि
-राजकीय सम्मान के साथ जामेतुर्रसाद कब्रिस्तान में किया गया सुर्पद-ए-खाक
आजमगढ़: पांच पर विधायक रहे आलम बदी का निधन केवल समाजवादी पार्टी के लिए ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में यह सिद्ध किया कि जनसेवा, सादगी, ईमानदारी और मजबूत चरित्र ही किसी राजनेता की वास्तविक पहचान होती है। उनके निधन से एक ऐसा जननेता इस दुनिया से विदा हो गया, जिसकी मिसाल आज की राजनीति में बहुत कम देखने को मिलती है। उनके समर्थक, कार्यकर्ता और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी उनकी शालीनता, सादगी और सिद्धांतनिष्ठा को हमेशा सम्मान के साथ याद करेंगे। यही कारण रहा कि गुरुवार को जब उनके कुर्मी टोला आवास से उनका जनाजा निकलना था तो उन्हें गार्ड आफ आनर दिया गया। वहीं उनके अंतिम दर्शन के लिए दलीय सीमाएं टूट गई। कुर्मी टोला से लेकर जामेतुर्रसाद कब्रिस्तान तक गए जनाजे में शामिल होकर सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि ने जिले के लोकप्रिय नेता को अंतिम विदाई दी। नगरवासियों ने भी जनाजे में शामिल होकर नम आंखों से विदा किया।
कारागार मंंत्री दारा सिंह चौहान तो कुछ दिन पहले ही उनसे मिलकर कुशलक्षेम पूछा था। निधन के बाद घर से लेकर कब्रिस्तान तक श्रद्धांजलि देने वालाें का तांता लगा रहा। फूलपुर-पवई विधानसभा क्षेत्र के विधायक रमाकांत यादव की पत्नी रंजना यादव ने घर पर श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके अलावा सपा सांसद धर्मेंद्र यादव व दरोगा प्रसाद सरोज, पूर्व मंत्री बलराम यादव, विधायक दुर्गा प्रसाद यादव, बेचई सरोज, कमलाकांत राजभर, डा. संग्राम यादव, नफीस अहमद, अखिलेश यादव व पूजा सरोज, सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, पूर्व एमएलसी राकेश यादव गुड्डू, पूर्व राज्य सभा सदस्य नंदकिशोर यादव, जोरार अहमद, कांग्रेस जिलाध्यक्ष कौशल कुमार सिंह मुन्ना, तेज बहादुर यादव, बसपा नेता जगदीश गुप्ता, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह, बीजेपी नेता अखिलेश मिश्र गुड्डू, मनोज यादव, राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल नेता तलहा रशादी, डॉक्टर महातम दुबे, डा
