नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग आधारित जिला सहकारिता सम्मेलन कार्यक्रम विकास भवन में सम्पन्न

नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग आधारित जिला सहकारिता सम्मेलन कार्यक्रम विकास भवन में सम्पन्न

“धरती माता बचाओ अभियान” के तहत नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग आधारित जिला सहकारिता सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन विकास भवन सभागार, जनपद आजमगढ़ में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद के मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी, आजमगढ़ संजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी, आजमगढ़ गगनदीप सिंह, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता, आज़मगढ़ अजय कुमार, अखिलेश कुमार यादव, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ और वरिष्ठ क्षेत्र प्रबंधक, इफको, आजमगढ़ जियाउद्दीन सिद्दीकी के साथ-साथ सहकारिता विभाग के समस्त अपर सहकारी अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी एवं 100 अधिक समितियों के सचिव उपस्थित रहें।
कार्यक्रम में “धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत उर्वरक संतुलित उपयोग, रासायनिक उर्वरक पर निर्भरता कम करने के लिए नैनो उर्वरक के उपयोग एवं महत्त्व, फार्मर आईडी आदि विषयों पर चर्चा की गयी।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा बताया गया कि हम बहुत बड़ी मात्रा में बाहर से केमिकल फर्टिलाइजर इंपोर्ट करते हैं। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से हमारी धरती माता को नुकसान पहुंच रहा है तथा खेतों की उर्वरा शक्ति लगातार प्रभावित हो रही है। यदि आज हम अपने खेतों को सुरक्षित नहीं रखेंगे तो भविष्य में फसलों के उत्पादन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए आवश्यक है कि रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करते हुए प्राकृतिक एवं संतुलित खेती की ओर बढ़ा जाए। उन्होंने कहा कि उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर हम विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ अपनी भूमि की गुणवत्ता को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
जिला विकास अधिकारी द्वारा बताया गया कि भूमि की उर्वरा शक्ति बनाये रखने के लिए रासायनिक उर्वरक के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए वैकल्पिक उर्वरक नैनो उर्वरकों के उपयोग हेतु किसानों में जागरूकता बढ़ाते हुए अधिकाधिक नैनो उर्वरक के उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। साथ ही समिति के सचिवों को समिति से खोलने और किसानों को पारदर्शी तरीके से उर्वरक वितरण करने के निर्देश दिए गए ताकि किसानों को असुविधा न हो और शासन की मंशा के अनुसार कार्य करने हेतु निर्देश
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी, आजमगढ़ ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने हेतु रासायनिक खादों का प्रयोग संतुलित मात्रा में करें, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर उन्हें मिट्टी में मिलाएं, जैविक खादों का अधिकाधिक उपयोग करें तथा फसल चक्र अपनाएं। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील करते हुए कहा कि इससे धरती माता का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा। उनके द्वारा नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं आधुनिक, लाभकारी खेती को अपनाने हेतु सभी को प्रेरित किया गया।
साथ ही किसानों के लिए फार्मर आईडी की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि फार्मर आईडी किसानों की एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान होगी, जो आधार कार्ड की तरह 12 अंकों की विशेष पहचान संख्या के रूप में विकसित की जा रही है। इसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, भूमि विवरण, बैंक खाता एवं आधार संख्या लिंक होगी। भविष्य में इसी फार्मर आईडी के माध्यम से रासायनिक खादों का वितरण किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी एवं वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंच सकेगा।

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