स्कूली बस में क्षमता से अधिक बच्चे, मासूमों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा, बच्चों से भरी स्कूली बस ने खड़े किए सुरक्षा पर गंभीर सवाल
रीना वर्मा
कन्नौज। एपीएस इंटर कॉलेज ठठिया की स्कूली बस में क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाने का मामला सामने आने के बाद स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि 32 सीटर बस में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक बच्चे सवार दिखाई दिए। बस में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर ले जाने का आरोप लगाते हुए लोगों ने परिवहन और शिक्षा विभाग से मामले की जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल की बस से एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों को घर पहुंचाया जाता है। वहीं, कुछ बच्चों को निजी वैन से भी क्षमता से अधिक संख्या में ले जाने की बात कही जा रही है। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चों को भीड़भाड़ वाले वाहनों में सफर कराना कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। ऐसे में स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट, निर्धारित क्षमता और सुरक्षा मानकों की जांच कराया जाना बेहद जरूरी है।
वहीं, एपीएस इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मानसिंह यादव ने बताया कि विद्यालय में करीब 500 बच्चे अध्ययनरत हैं और स्कूल के पास एक बस है। बस से करीब 100 बच्चों को दो चरणों में भेजा जाता है। प्रधानाचार्य के अनुसार, बच्चे बस में बैठते नहीं है बल्कि खड़े होकर यात्रा करते हैं जिसके कारण बस में बच्चों की संख्या अधिक दिखाई देती है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि बस में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। अभिभावकों ने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस से कस्बे में विशेष चेकिंग अभियान चलाकर स्कूली बसों और निजी वैन की जांच कराने की मांग की है।
अभिभावकों का कहना है कि यदि जांच में क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाने या अन्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित वाहन संचालकों और जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका सवाल है कि आखिर स्कूली वाहनों की नियमित जांच कब हुई और क्या जिम्मेदार विभाग ने सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की है?
अब पूरे मामले में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए परिवहन और शिक्षा विभाग को स्कूली वाहनों की फिटनेस, निर्धारित क्षमता, परमिट और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की जरूरत है, ताकि किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।
