दिल्ली पुलिस की बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और इंसानियत की एक प्रेरणादायक मिसाल राजधानी दिल्ली के सफदरजंग इलाके में देखने को मिली।
एंकर …दिल्ली पुलिस के एक जांबाज़ हेड कांस्टेबल ने अपनी जान की परवाह किए बिना आग की लपटों में फंसे 74 वर्षीय बुजुर्ग की जान बचाकर बहादुरी की मिसाल पेश की है। दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव स्थित अर्जुन नगर में लगी भीषण आग के बीच हेड कांस्टेबल हरीश ने जिस साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
दिल्ली पुलिस के पीसीआर, साउथ-वेस्ट ज़ोन की ज़ेब्रा-14A पर तैनात हेड कांस्टेबल हरीश ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक 74 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक की जान बचा ली।
21 जुलाई 2026 को ड्यूटी के दौरान हेड कांस्टेबल हरीश को सूचना मिली कि सफदरजंग एन्क्लेव के अर्जुन नगर स्थित D-35 में एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई है।
सूचना मिलते ही पीसीआर टीम मौके पर पहुंची। तब तक आग तेजी से फैल चुकी थी और पूरी इमारत धुएं से भर गई थी। इसी बीच पता चला कि एक 74 वर्षीय बुजुर्ग अंदर फंसे हुए हैं और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है।
ऐसे कठिन हालात में हेड कांस्टेबल हरीश ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया। वे धुएं और आग की लपटों के बीच इमारत के अंदर पहुंचे और अपनी सूझबूझ व साहस से बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
समय रहते किए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन से एक बड़ा हादसा टल गया और एक कीमती जान बच गई।
हालांकि इस दौरान हेड कांस्टेबल हरीश स्वयं भी धुएं की चपेट में आ गए और उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इसके बाद उन्हें तुरंत सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के बाद उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
हेड कांस्टेबल हरीश की यह बहादुरी न सिर्फ दिल्ली पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि पुलिस हर परिस्थिति में नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटती।
“आग की भयावह लपटें हों या धुएं से भरी इमारत… दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल हरीश ने यह साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने का संकल्प भी है।
